मुझे अस्सी के दशक में इथियोपिया की तकलीफदेह तस्वीरें याद है जब उत्तरपूर्वी अफ्रीका में फैले अकाल के चलते दस लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. यह ऐसी दुखद स्थिति थी जब 1985 के लाइव सहायता कन्सर्टों (संगीत कार्यक्रम), आंशिक तौर पर लम्बे समय तक चले युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और इथियोपियावासियों की अनिश्चितता ने सारी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था. उनका देश बाल मृत्यु दर समेत प्रत्येक स्वास्थ्य संकेतक के मामले में दुनिया में लगभग सबसे नीचे था.
काल, युद्ध और राजनीतिक अशांति के चलते 1980 के दशक में लाखों की संख्या में लोग विस्थापित हुए जिसके चलते सारी दुनिया से पैसा और सहायता यहाँ पहुँचाई गई(इथियोपिया, 1984-1985).
करीब एक दशक पहले तस्वीर बदलने लगी. इसका ज्यादातर श्रेय सभी इथियोपियाई नागरिकों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के एक बड़े सरकारी लक्ष्य को जाता है. जब इथियोपिया ने वर्ष 2000 में एमडीजीस लक्ष्यों पर हस्ताक्षर किया तब देश ने अपनी स्वास्थ्य महत्वाकांक्षाओं के सामने ठोस अंकों को रखना शुरू किया. एमडीजी लक्ष्य के तहत बाल मृत्यु दर को दो तिहाई तक कम करने की सफलता या असफलता के लिए ठोस प्रयास किया. एमडीजी लक्ष्यों के प्रति इथियोपिया की प्रतिबद्धता से इसे प्राथमिक स्वास्थ्य रक्षण सेवाओं को सुधारने के लिए दानदाता देशों से अभूतपूर्व मदद मिली.
इस लक्ष्य को पाने के लिए इथियोपिया को भारत के एक राज्य केरल में एक सफल मॉडल मिला, इस राज्य ने अपनी बाल मृत्य दर को बहुत कम कर लिया था और अन्य बहुत से स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार किया था और इसके पास सामुदायिक स्वास्थ्य रक्षण चौकियों का एक विशाल तंत्र (नेटवर्क) भी था. मापन का यह प्रमुख लाभ है, यह सरकारी नेताओं को क्षमता देता है कि वे विभिन्न देशों के बीच तुलना कर सकें, यह पता लगा सकें कि कौन सा देश अच्छा काम कर रहा है और सबसे अच्छी तरह से सीख रहा है. केरल के प्रतिनिधियों की मदद से इथियोपिया ने 2004 में अपना सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया.
आज इथियोपिया में 15 हजार से ज्यादा स्वास्थ्य चौकियाँ हैं जोकि साढ़े 8 करोड़ लोगों के ग्रामीण इलाके को दूर दूर तक प्राथमिक स्वास्थ्य रक्षण उपलब्ध करा रही हैं. इन चौकियों पर 34 हजार स्वास्थ्य कार्यकर्ता तैनात हैं जिनमें से ज्यादातर युवा महिलाएँ हैं जोकि एक वर्ष की बुनियादी स्वास्थ्य ट्रेनिंग के बाद अपने समुदायों की सेवा कर रही हैं.
वर्ष 2009 में मेलिंडा ने इथियोपिया का दौरा किया और देखा कि इन स्वास्थ्य सुधारों के चलते देश किस तरह से बदल रहा है. पहले जहाँ स्वास्थ्य सेवाएँ नहीं थीं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में टीकों और दवाएँ बड़ी मात्रा में मौजूद थीं. जहाँ कभी स्थानीय स्तर पर बहुत कम स्वास्थ्य विशेषज्ञता थी, पर मेलिंडा ने देखा कि अब स्वास्थ्यकर्मी बच्चों के जन्म में मदद कर रहे थे, टीके लगा रहे थे और परिवार नियोजन में मदद कर रहे थे.
पिछले मार्च में जब मैं पहली बार इथियोपिया गया तो मुझे यह प्रगति देखने का मौका मिला. ग्रामीण इलाकों में सैर करते हुए मैंने लोगों को स्वास्थ्य रक्षण से जोड़ने की इथियोपिया की चुनौती को अनुभव किया. ग्रामीण इथियोपिया खेती योग्य जमीन के दूर-दूर तक फैले इलाके से बना है, इस इलाके की 85 फीसद आबादी दो एकड़ से भी कम जमीन के टुकड़ों पर निर्भर करती है. ये खेत कभी-कभी बहुत ऊबड़ खाबड़ रास्तों से जुड़े होते हैं. जर्मेना गेल हैल्थ चौकी के रास्ते पर जाते समय मैंने लोगों को स्थानीय घास के बड़े-बड़े गट्ठर ले जाते देखा, इसके दानों से यहाँ के लोग रोटियाँ बनाते हैं, मैंने लोगों को इधर-उधर घूमते देखा. कुछेक साइकिलों को छोड़कर अन्य वाहन बहुत ही कम थे.
पुरानी पड़ चुकी हरे रंग की सीमेंट की इस इमारत में स्वास्थ्य चौकी थी और यह मेरे अनुमान से ज्यादा बड़ी थी, आप कह सकते हैं कि कार्यकर्ता इस स्थान का अच्छा ख्याल रखते हैं. इसके अंदर दो स्वास्थ्य कर्मियों ने मुझे अपने काम आने वाले उपकरणों की आलमारी को दिखाया और इनमें फॉलिक एसिड, विटामिन ए के सप्लीमेंट्स और मलेरिया की दवाइयाँ थीं.
इथियोपिया की स्वास्थ्य चौकियों में सटीक रिकॉर्ड जिनमें नवजात शिशुओं संबंधी विवरण और अन्य जानकारी उपलब्ध रहती है, उन्होंने देश में बाल मृत्यु दर को कम करने और अधिकाधिक टीकाकरण क्षेत्र को बढ़ाने में मदद की है (डालोचा, इथियोपिया, 2012).
चौकी पर ज्यादातर सेवाएँ कार्यकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराई जाती हैं हालाँकि वे गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को देखने के लिए उनके घरों में भी जाते हैं. वे सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक घर में एक मच्छरदानी हो ताकि परिवार को मलेरिया से बचाया जा सके, एक गड्ढेदार शौचालय हो, लोगों को फर्स्ट एड की ट्रेनिंग मिली हो और वे अन्य बुनियादी स्वास्थ्य और सुरक्षा के उपाय जानते हों. एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने मुझे बताया कि उसने इस वर्ष 41 प्रसूतियाँ कराई हैं और उनमें से ज्यादातर उनके घरों पर कराई गई थीं.
इस तरह के ये सभी प्रयोग बुनियादी हैं लेकिन तब भी इन्होंने इस देश के लोगों के जीवन में नाटकीय सुधार किया है. बचपन में होने वाली मौतें घट गई हैं. और इसी तरह से प्रसव के दौरान महिलाओं की मौतों की संख्या कम हो गई है. गर्भ निरोधक उपाय ज्यादातर महिलाओं की पहुँच के दायरे में हैं और वे तय कर सकती हैं कि कब उन्हें बच्चे चाहिए और कब नहीं. मेलिंडा फाउंडेशन के परिवार नियोजन के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करने में अग्रणी रही हैं (नीचे उनका फीचर देखें).
डालोचा की एक युवा माँ की कहानी पर जरा ध्यान दें. सेब्सेबिला नासिर का जन्म 1990 में अपनी झोपड़ी के गंदे फर्श पर हुआ था. जीवन रक्षक टीकों या बुनियादी स्वास्थ्य रक्षण तक बहुत कम पहुँच के कारण तब इथियोपिया के करीब 20 फीसद बच्चे अपनी उम्र के पाँचवें वर्ष तक नहीं जी पाते थे. सेब्सेबिला के छह भाई बहनों में से दो की बचपन में मौत हो गई थी.
स्वास्थ्य के मामले में इथियोपिया के प्रयास कम हैं, 1990 से बाल मृत्युदर 60 प्रतिशत से भी अधिक है.
लेकिन कुछेक वर्ष पहले जब डालोचा में एक स्वास्थ्य चौकी खुली तो गाँव का जीवन बदलने लगा. पहली बार उसे गर्भ निरोधकों के बारे में जानकारी मिली, इसलिए अब वह तय कर सकती है कि वह और उसका पति कब और बच्चों के पालन पोषण के लिए तैयार हैं. पिछले वर्ष ऐसा समय आया जब सेब्सेबिला गर्भवती हो गई तो एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने उसका नियमित परीक्षण किया. इस कार्यकर्ता ने उसे इस बात के लिए भी प्रोत्साहित किया कि वह अपने बच्चे को स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्र में जन्म दे, अपने घर पर नहीं जहाँ उसने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था.
28 नवंबर को, सेब्सेबिला को प्रसव पीड़ा हुई , वह गधा गाड़ी पर सवार होकर स्वास्थ्य केंद्र पहुँची. वहाँ सात घंटे की प्रसव पीड़ा के दौरान एक दाई उसके बिस्तर के पास रही. उसकी बेटी के जन्म के बाद, जल्दी ही बच्चे को पोलियो और तपेदिक की खुराक दी गई. स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने सेब्सेबिला की बच्ची को डिप्थीरिया, टिटेनस, काली खाँसी, हेपेटाइटिस बी, मस्तिष्क ज्वर, निमोनिया, और खसरा से सुरक्षा के लिए उसे टीके लगवाने के लिए समय-सारणी वाला प्रतिरक्षण कार्ड दिया.
एक सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता नूरिया अली में सेब्सबिला नासिर को सिखा रही है कि वह अपनी नवजात बेटी, अमीरा, की देखभाल कैसे करें (डालोचा, इथियोपिया, 2012).
प्रतिरक्षण कार्ड में ऊपर का स्थान उसकी बच्ची के नाम के लिए रिक्त था. इथियोपियाई परंपरा के अनुसार, अभिभावक अपने बच्चे का नाम रखने के लिए प्रतीक्षा करते हैं, क्योंकि बीमारी तेज़ी से फैलती है, स्वास्थ्य देखभाल अपर्याप्त है, और अक्सर पहले सप्ताह में ही बच्चों की मृत्यु हो जाती है. सेब्सेबिला को भी अपने जन्म के कई सप्ताह बाद तक नाम नहीं दिया गया था. और जब तीन वर्ष पहले उसकी पहली बच्ची का जन्म हुआ, उसने इस डर के साथ कि उसकी बच्ची जीवित नहीं रहेगी, परंपरा का पालन किया और नाम देने के लिए एक माह प्रतीक्षा की.
लेकिन सेब्सेबिला के पहले बच्चे के जन्म के बाद से अब इथियोपिया में बहुत परिवर्तन हो गए हैं. इस समय, उसकी नवजात बच्ची के जीवित रहने की अधिक संभावनाओं के साथ, सेब्सेबिला ने उसका नाम रखने में कोई संकोच नहीं किया. टीकाकरण कार्ड के ऊपर रिक्त स्थान में, उसने अरबी में "अमीरा"-"प्रिंसेस" लिखा. सेब्सेबिला का आशावादी दृष्टिकोण अकेला मामला नहीं है. देश को 2015 तक इस महत्वपूर्ण एमडीजी लक्ष्य को प्राप्त करने और कई अभिभावकों को जन्म के दिन ही अपने बच्चों का नाम रखने का विश्वास दिलाते हुए, 1990 से इथियोपिया के स्वास्थ्य संबंधी प्रयासों से शिशु मृत्यु दर में 60 प्रतिशत से अधिक कमी आई है.
प्रगति का वर्णन, लक्ष्यों को निर्धारित करना और उनके लिए प्रगति का मूल्यांकन करना है. एक दशक पहले, ग्रामीण इथियोपिया में बच्चे के जन्म या मृत्यु का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं था. जर्मेना गेल हेल्थ पोस्ट में, मैंने दीवारों पर प्रतिरक्षण, मलेरिया, और स्वास्थ्य संबंधी डेटा चार्ट देखें. प्रत्येक संकेतक में वार्षिक लक्ष्य और तिमाही लक्ष्य था. नियमित रिपोर्ट जेनरेट करने के लिए यह सभी जानकारी सरकारी जानकारी सिस्टम में जाती है. कार्यों की जानकारी लेने और रिपोर्ट देखने और आवश्यक कार्यवाही करने के लिए सरकारी अधिकारी प्रत्येक दो माह में मीटिंग करते हैं.
जब तक वैश्विक स्वास्थ्य में प्रगति करने के लिए मापन जोखिमपूर्ण होगा, तब तक ठीक से कार्य करना बहुत कठिन है. आपको सही तरीके से मूल्यांकन करना होगा, साथ ही ऐसा परिवेश बनाना होगा, जहाँ समस्याओं पर स्पष्ट रूप से चर्चा की जा सक, जिससे आप प्रभावी रूप से आंकलन कर सकें कि क्या कार्य हो रहा है और क्या नहीं. टीकाकरण और अन्य सुविधाओं के लिए लक्ष्य निर्धारित करना, सरकारी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करता है, लेकिन यह निरीक्षक से होने वाली समस्याओं से बचने के लिए बढ़ा-चढ़ा कर रिपोर्ट करने के लिए भी उकसा सकता है.
इथियोपिया के प्रतिरक्षण कार्यक्रम की प्रगति पर नज़र रखने के लिए उसका प्रयास, सही समाधान के बेहतर वितरण के लिए डेटा का उपयोग करके-सबसे कठिन भाग-डेटा से जानने का एक अच्छा उदाहरण है. इथियोपिया के टीकाकरण कवरेज के हाल ही के राष्ट्रीय सर्वेक्षण में सरकारी आंकलन के अत्यधिक भिन्न परिणाम बताए गए हैं. इथियोपिया इस विरोध पर ध्यान न देकर सबसे अनुकूल डेटा प्रदान कर सकता था. इसके बजाय, इसने मापन भिन्न होने का कारण समझने के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों की सहायता ली. उन्होंने विस्तृत स्वतंत्र सर्वेक्षण का कार्य सौंपा, जिससे बहुत उच्च कवरेज-और बहुत निम्न कवरेज के भौगोलिक खंड को निर्धारित किया गया है. अब सरकार निम्न प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों के लिए बेहतर योजनाएँ बनाने के लिए कार्य कर रही है.
इथियोपिया की एमडीजी पर की जाने वाली प्रगति अब उसके पड़ोसियों को ध्यान आकर्षित कर रही है. बिल्कुल इथियोपिया की तरह, जिसने भारतीय राज्य केरल से सीखा है, मलावी, रवांडा, और नाइजीरिया सहित अन्य देश अब इथियोपिया के अनुभव से सीखने के लिए वहाँ की यात्रा करने के बाद विस्तारित स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे हैं.